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SKON About
10+

वर्षों की सेवा

हमारे बारे में

श्रीकृष्ण भक्ति, ज्ञान और सेवा से जुड़ी एक आध्यात्मिक संस्था

Spiritual Society for Krishna Organisation (SKON) श्रीकृष्ण भक्ति और सनातन वैदिक परम्परा के प्रति समर्पित संस्था है।

SKON का प्रयास है कि भक्तों एवं श्रद्धालुओं को भक्ति, ज्ञान, साधना, सत्संग, संस्कृति और सेवा से जुड़ने के अवसर मिलें।

आध्यात्मिक कार्यक्रम

गीता, सत्संग, यात्राएं

बच्चे और युवा

संस्कार एवं सांस्कृतिक गतिविधियां

बृज दर्शन

पवित्र धामों की यात्रा

सेवा कार्य

समाज और प्रसाद सेवा

संस्था की गतिविधियों में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ बच्चों और युवाओं के लिए संस्कार एवं सांस्कृतिक गतिविधियाँ, बृज से परिचय, आध्यात्मिक यात्राएँ तथा सेवा से जुड़े कार्य शामिल हो सकते हैं।

और जानें →
SKON की प्रेरणा

श्रीकृष्ण भक्ति और सनातन परम्परा से

SKON की प्रेरणा श्रीकृष्ण भक्ति, श्रीमद्भगवद्गीता और सनातन वैदिक परम्परा से मिलती है।

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद के माध्यम से कर्म, कर्तव्य, आत्मा, योग और भक्ति जैसे विषयों पर मार्गदर्शन मिलता है।

कर्म

कर्तव्य

आत्मा

योग

भक्ति

SKON इन शिक्षाओं को समझने, सुनने, विचार करने और जीवन के संदर्भ में देखने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास करता है।

भगवद्गीता अध्ययन से जुड़ें 📖
"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन"
- श्रीमद्भगवद्गीता 2.47
SKON का उद्देश्य

दृष्टि • मिशन • मूल मूल्य

हमारी दृष्टि

भक्ति को जीवन से जोड़ना

हम ऐसी आध्यात्मिक संगति का वातावरण विकसित करना चाहते हैं जहाँ व्यक्ति श्रीकृष्ण भक्ति को समझ सके, शास्त्रों से सीख सके, साधना के लिए प्रेरित हो और सेवा के माध्यम से आध्यात्मिक मूल्यों को अपने जीवन में स्थान दे सके।

हमारा मिशन

भक्ति, ज्ञान और सेवा के माध्यम से लोगों को जोड़ना

  • भक्ति – श्रीकृष्ण के नाम, भक्ति और संकीर्तन से जुड़ने के अवसर
  • ज्ञान – श्रीमद्भगवद्गीता एवं आध्यात्मिक ज्ञान के अध्ययन को प्रोत्साहन
  • सत्संग – श्रवण, संवाद और आध्यात्मिक संगति
  • साधना – जप, नाम-स्मरण और नियमित आध्यात्मिक अनुशासन
  • संस्कार – बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों से परिचित कराना
  • सेवा – धार्मिक, सांस्कृतिक एवं समाजोपयोगी गतिविधियों में सहभागिता
  • ब्रज एवं तीर्थ – ब्रज तथा भारत की आध्यात्मिक एवं तीर्थ-परम्पराओं से परिचय

हमारे मूल मूल्य

भक्ति – श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण
सत्य एवं सदाचार – विचार, वाणी और आचरण में सत्यनिष्ठा एवं मर्यादा
ज्ञान – अध्ययन, श्रवण और चिंतन के माध्यम से समझ विकसित करना
अनुशासन – नियमितता, संयम और जिम्मेदारी
सेवा – समय, श्रम, प्रतिभा और सामर्थ्य के अनुसार योगदान
संस्कार एवं संस्कृति – नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़ना
सम्मान – व्यक्ति, परम्परा, संस्कृति, प्रकृति और समाज के प्रति सम्मान
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